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Wednesday, November 21, 2012

Śabdānuśāsana 8.4.343, Sattasaī 163

विप्पिअआरउ जइ वि पिउ तो वि तं आणहि अज्जु ।
अग्गिण दड्ढा जइ वि घरु तो तें अग्गिं कज्जु ॥

जेण विणा ण जिविज्जइ अणुणिज्जइ सो कआवराहो वि ।
पत्ते वि णअरडाहे भण कस्स ण वल्लहो अग्गी ॥

Thursday, November 15, 2012

Chandonuśāsana 6.22.3

चूडुल्लउ चुण्णीहोइसइ मुद्धि कओलि निहित्तउ ।
निद्दड्ढउ सासाणलिण बाह-सलिल-संसित्तउ ॥